बचपन की वह ठंडी शाम आज भी याद है, जब मैं अपनी सखियों के साथ मुठ्ठीगंज की उसी पुरानी नुक्कड़ वाली दुकान पहुँचती थी। Hari Ram & Sons की दुकान, जो लोकनाथ चौक के बीचोंबी…
और पढ़ेंगाँव की धूल भरी गलियाँ, जहां सूरज की पहली किरण भी झोपड़ियों के बीच से लड़ते-लड़ते आती थी, वहीं मेरा बचपन बीता। 1990 के दशक का वो दौर, जब बच्चे छोटे छोटे कामों में हाथ बं…
और पढ़ेंजयपुर की बारिश भरी रात थी, सड़कों पर पेड़ों की छाया, दूर कहीं लालटेनों की हल्की रोशनी। लेखिका गुड़िया शर्मा अपने पुराने पैतृक घर लौटी थी। राखबन्धन करीब था, मगर इस बार उ…
और पढ़ेंकल रात ठीक 10 बजे, जयपुर स्टेशन पर मैं — गुड़िया शर्मा — और मेरी पुरानी सहेली रीना सपरिवार मिल गए। रीना को देखकर मुझे बरसों पुरानी याद आ गई… और हाँ, ये वही रीना थीं, जि…
और पढ़ेंबरसात का मौसम अपने पूरे शबाब पर था। बाहर तेज़ बारिश हो रही थी — गली में कीचड़, छत से टपकती बूँदें, और हर कहीं मिट्टी की सोंधी खुशबू। गुड़िया, 35 साल की टीचर, रोज़ की तरह…
और पढ़ेंआज मैंने सोचा कि बाल धोने के साथ-साथ अपना मनपसंद सैलून स्पा भी कर आऊँ। बस, एक घंटा लगता है—यहीं सोचकर निकल गई। जाते-जाते पति देव को बोले, "बस एक घंटे में वापस आ ज…
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