Advertisement

प्रयागराज के मशहूर Hari Ram & Sons के मिनी और नमकीन समोसे की अनकही कहानी













बचपन की वह ठंडी शाम आज भी याद है, जब मैं अपनी सखियों के साथ मुठ्ठीगंज की उसी पुरानी नुक्कड़ वाली दुकान पहुँचती थी। Hari Ram & Sons की दुकान, जो लोकनाथ चौक के बीचोंबीच है, उसकी खुशबू दूर-दूर तक फैलती थी। वहाँ का मशहूर मिनी समोसा हर उम्र के लोगों का पसंदीदा था।

"बिटिया, आज क्या खाने आई हो?" दुकान के बाहर खड़े भैया की हँसी-ठिठोली में हम खो जाते। हर रोज़ वहाँ एक नई रौनक होती—तीखे आलू-मटर वाले मिनी समोसे, और मूँग दाल वाले नमकीन समोसे, जो अपनी करारापन और मसालों से हर किसी का दिल जीत लेते।

मुठ्ठीगंज जैसे मोहल्ले में यह दुकान लोगों की पसंदीदा बैठक थी। बच्चों से लेकर पुराने मितरों तक सभी शाम को चाय के साथ यहाँ की विशेषता समोसे खाने आ जाते। एक प्लेट में गरमागरम मिनी समोसे, दूसरी में नमकीन मूँग दाल वाले समोसे, और हर निवाले के साथ कुछ मीठी-खीटी इमली की चटनी का स्वाद, जैसे पूरी मग में बसंत आ गया हो।

Hari Ram & Sons के समोसों का स्वाद कभी पुराना नहीं होता। यहाँ की दुकान में अगर मुंबई, दिल्ली, या किसी बड़े शहर की शान के किसी पाँच सितारा होटल के समोसों के मुकाबले खाओ तो भी इसे टक्कर नहीं मिलेगी। यह स्वाद मोहल्ले की मिट्टी, लोगों की बातचीत और बचपन की यादों से जुड़ा है।

बारिश के दिन जब माहौल ठंडा होता, तब Loknath Bazaar की इस दुकान पर चाय के साथ ये समोसे खाना, और पुराने दोस्तों के साथ बातें करना जैसे जीवन का सबसे बड़ा सुख होता। ये समोसे न सिर्फ़ भूख मिटाते बल्कि रिश्तों को भी मजबूत करते रहे।

जब मैं शहर से बाहर जाती हूँ और लोगों से पूछती हूँ कि प्रयागराज की सबसे खास चीज़ क्या है, तो बिना किसी हिचकिचाहट के कहती हूँ—Hari Ram & Sons के मिनी और मूँग दाल वाले नमकीन समोसे। क्योंकि इनमें बसता है हमारे शहर का आत्मीयपन, उसकी संस्कृति और उस खास एहसास का स्वाद जो हर किसी को यहीं वापस खींच लाता है।

समोसों का ये प्यारा संसार कभी नहीं बदल सकता—न तो दुकान बदल सकती है और न ही उस स्वाद की मिठास। यही है हमारी बरसों पुरानी पहचान, जो हर निवाले में बसती चली आ रही है।

इस रेसिपी की पूरी विडियो भी यहाँ से देख सकते हैं https://youtu.be/ofIZszkO-sk



एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ